आज के बदलते दौर में भारतीय खेल संघ में खिलाड़ियों का बढ़ता वर्चस्व एक सुखद अनुभूति है। अगर हम देखें अपने अगल-बगल तो भारतीय खेल संघ में 90% ...
आज के बदलते दौर में भारतीय खेल संघ में खिलाड़ियों का बढ़ता वर्चस्व एक सुखद अनुभूति है। अगर हम देखें अपने अगल-बगल तो भारतीय खेल संघ में 90% भागीदारी राजनीतिज्ञों और अधिकारियों की है।
वे भले ही एकेडमी रूप में मजबूत हैं लेकिन खेल की जमीनी हकीकत से दूर है।
परंतु वर्तमान सरकार की बदलती विचारधारा के फलस्वरूप इसमें धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है।
इसकी शुरुआत सर्वप्रथम ओलंपिक पदक विजेता राज्यवर्धन राठौर से हुई जिनके अनुभव का फायदा हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी ने सर्वप्रथम उठाया और उनको केंद्र में खेल मंत्री की भूमिका दी। उनके ही कार्यकाल में खेलो इंडिया तथा योजनाएं चली जिसका परिणाम आज हमें देखने में मिल रहा है।
अगर हम भारतीय खेल संघ में देखें तो वर्तमान समय में पूर्व क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली बीसीसीआई अध्यक्ष हैं।
जिनके अनुभव का लाभ भारतीय क्रिकेट जगत उठा रहा है। भारतीय फुटबॉल संघ में भी चमत्कारिक परिवर्तन हुआ है। 88 साल के इतिहास में कल्याण चौबे पहले खिलाड़ी बने जिन्हें फुटबॉल संघ का अध्यक्ष बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
इसी बदलते परिवेश में वर्तमान समय में भारतीय एथलेटिक्स संघ के अध्यक्ष आदिल सुमारी वाला है। जो अपने जमाने के अच्छे दिख रहे हैं।
सबसे बड़ा चमत्कार भारतीय हॉकी खेल संघ में हुआ, जिसमें पूर्व कप्तान दिलीप तिर्की पहले खिलाड़ी हैं। जो अध्यक्ष बने वह पूर्व भारतीय टीम के कप्तान रहे हैं। इन्होंने सर्वाधिक 412 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं।
हमारा और भारत के खेल प्रेमियों का मानना है, कि दिग्गज भारतीय खिलाड़ी दोबारा अपने संबंधित खेल संघों का कायाकल्प करें। जिसके द्वारा आने वाली युवा खेल प्रतिभाएं लाभान्वित को वह दिन दूर नहीं है, जब विभिन्न खेलों से संबंधित विशेषज्ञ खिलाड़ी अपनी सेवाओं को देने के लिए पुनः अपनी सेवाएं देने के लिए आगे आएंगे यह शुरुआत बड़ी सुखद है।
अगर यही प्रयास वर्तमान सरकार के नेतृत्व में जारी रहा तो वह दिन दूर नहीं जब हम खेल की दुनिया में एक शक्ति के रूप में जाने जाएंगे तथा हमारा युवा वर्ग तकनीकी के साथ-साथ स्वस्थ रहकर भारत के विकास में योगदान देगा।
सौजन्य से: डॉ० आलोक कुमार द्विवेदी

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